भाद्रपद हिंदू कैलेंडर में बहुत ही शुभ महीनों में से एक माना जाता है। यह महीना सबके प्रिय भगवान श्री गणेश का उत्सव का माह भी माना जाता है। खास तौर पर यह भाद्रपद पूर्णिमा का त्यौहार गुजरात राज्य में बहुत ही अधिक प्रचलित है।
भारत वर्ष मे पितृ पक्ष को श्राद्ध के रूप में भी जाना जाता है और दोनों का आश्य भी एक ही है। श्राद्ध ज्यादातर सिंतबर या अक्बूर में पडते है और इन दिनों किसी भी प्रकार के नये काम की शुरुआत नहीं की जाती है।pitru paks
इन दिनों में पूर्वजों व पितरों (यानि जो परिवार के सदस्य मृत्यु को प्राप्त हो चुके है जैसे माता पिता, दादा दादी, चाचा, चाची, भाई, बहन आदि ) को विशेष सम्मान और श्रद्धांजलि दी जाती है। पितृ पक्ष लगभग दो सप्ताह की अवधि तक चलता है और यह अवधि भारतीय चंद्र माह में पड़ती है, जोकि ग्रेगोरियन कैलेंडर महीनों से मेल खाती है।
हिंदी दिवस भारतीयों के दिल के बेहद करीब है क्योंकि यह हिदी भाषा को पूर्ण रुप से समर्पित है। इस दिन कई तरह के कार्यक्रम आयोजित किये जाते है और लोग इसमें बढचढ कर हिस्सा लेते है। हिंदी दिवस कई मायनों में खास है क्योकिं यह हमें हमारी भाषा की महत्ता के बारें मे बताता है।
Onam is Kerala’s most important and beautiful festival. It is celebrated during the months of August end and Spetember beginning. It is basically celebrated in the first month (Chingam) of Malayalam Calendar (Kollavarsham). Onam Festival is celebrated for ten days with great enthusiasm and happiness among everyone. Onam is called Thiru-Onam or Thiruvonam (Sacred Onam Day). Another name for the festival is the 'Sravanmahotsav'.
क्या है कल्कि अवतार
हिन्दू मान्यताओं के अनुसार, कल्कि अवतार भगवान् विष्णु जी का दसवें अवतार होंगे| ऐसा माना जाता है की कल्कि अवतार इस दुनिआ से पापियों का सर्वनाश और पृथ्वी को कष्ट मुक्त कराने के लिए होगा| कल्कि द्वादशी भाद्रपद के महीने के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को मनाई जाती है| कल्कि नाम शब्द "काल" से आया है| यह अवतार दुष्टों के युग को ख़तम कर सतयुग की और लेजाने के लिए बना है| हिन्दू पुराण और शास्त्रों के अनुसार कल्कि अवतार सफ़ेद घोड़े पर हाथ में तलवार लिए आएंगे|
भाद्रपद मॉस के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को अनंत चतुर्दशी का शुभ त्यौहार मनाया जाता है| इस दिन अनंत भगवान् श्री विष्णु जी की पूजा उपासना की जाती है| पूजा उपासना के बाद अनंत रक्षा सूत्र धारण करने की भी मान्यता है| मान्यता है कि जाता है कि जब पाण्डव सारा राज्य हारकर वनवास के दुख भोग रहे होते हैं, तब भगवान श्रीकृष्ण उन्हें अनन्त चतुर्दशी व्रत करने को कहते हैं. श्री कृष्ण के कथन अनुसार धर्मराज युधिष्ठिर ने अपने भाइयों तथा द्रौपदी के साथ पूरे विधि विधान से इस व्रत का पालन करते हैं तथा अनन्तसूत्रधारण किया जिसके फलस्वरुप पाण्डवों को अपने समस्त कष्टों से मुक्ति प्राप्त होती है.
आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा कहा जाता है जिसका बहुत ही खास महत्व हैं। इस पूर्णिमा को रास पूर्णिमा भी कहा जाता है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार ये माना जाता है कि पूरे साल में सिर्फ इसी दिन चंद्रमा सोलह कलाओं का होता है और अपने आप में काफी अद्भूत होता है। चंद्रमा की सुदंरता देखते ही बनती है । इसके अलावा इससे निकलने वाली किरणें अमृत के समान मानी जाती है।
गणेश चतुर्थी के दिन भगवान् गणेश हम सब के बीच पधारते हैं और हम सभी दस दिन तक उनकी सेवा में कोई कमी न छोड़ने का प्रयास करतें है | वैसे तो यह त्यौहार दस दिन तक मनाया जाता है, परन्तु जो लोग दस दिन तक गणेश जी का पूजन करने में असमर्थ रहते है| वे लोग अपनी क्षमता अनुसार डेढ़, चौथे, पांचवे, सातवे या ग्यारवे दिन गणेश जी का विसर्जन करतें हैं| मान्यता है कि मार्ग में उन्हें किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। इसलिए जैसे पुराने समय में घर से निकलते समय जो भी यात्रा के लिए तैयारी की जाती थी वैसी श्री गणेश के बिदाई के समय की जानी चाहिए।
भारतीय संस्कृति में त्यौहारों का खास महत्तव है और इसीलिये हर महीने कोई ना कोई त्यौहार हम लोग मनाते रहते है। त्यौहारों के बिना जीवन फीका सा लगता है। कन्या संक्राति भी एक बहुत ही विशेष उपलक्ष्य हैं।
कन्या संक्राति और भारतीय हिंदू कैलेंडर –
साल में कुल 12 संक्राति आती है । सभी बारह संक्रांति दान-पुण्य कार्यों के लिए अत्यधिक शुभ मानी जाती हैं और इस दिन लोग पूरे मन से दान भी करते हैं। यहां यह बताना बहुत जरुरी है कि संक्रांति से पहले या बाद में केवल एक निश्चित समय की अवधि के दौरान ही संक्रांति से संबंधित कार्यों के लिए शुभ माना जाता है। यानि की आपको थोड़ा सा ध्यान देने की आवश्यकता है यदि आप विशेष फल चाहते हैं।
श्राद्ध हिंदु धर्म में बहुत ही अधिक महत्तव रखते हैं। श्राद्ध के दौरान कोई नया मांगलिक काम शुरू नहीं किया जाता। इसके अलावा बहुत सी अन्य बातों का ख्याल भी रखा जाता है। श्राद्ध हमें मौका देते है कि हम अपने पूर्वजों का विशेष आशीर्वाद उनकी पूजा करके प्राप्त कर सकें। जो लोग श्राद्ध में अपने पूर्वजों का तर्पण नहीं करते हैँ उन्हें उनका विशेष आशीर्वाद प्राप्त नहीं होता है।
श्राद्ध का अनुष्ठान –
हिंदू धर्म में, श्राद्ध अनुष्ठान एक बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान रखते है। इस दिन, भक्त अपने मृत पूर्वजों की आत्माओं के लिए उन्हें मुक्ति और शांति प्रदान करने के लिए पूजा-पाठ और अन्य अनुष्ठान करते हैं। श्राद्ध पूजा पारंपरिक हिंदू कैलेंडर में 'अश्विन' के महीने में 'पितृ पक्ष' (पूर्वजों के लिए समर्पित पखवाड़े), 'कृष्ण पक्ष' (चंद्रमा का वानपन चरण) के दौरान किया जाता है।
मासिक कार्तिगाई एक विशेष मासिक-त्यौहार है जिसे बहुत ही हर्षोल्लास से मनाया जाता है। इस त्यौहार को तमिल-हिंदुओं द्वारा भी बहुत ही जोर-शोर के साथ मनाया जाता है।
भगवान भगवान् शिव का आशीर्वाद -
आदिम और थाई के तमिल महीनों से शुरू होने वाले छह महीनों के लिए अनुष्ठान मनाया जा सकता है। लगातार 12 वर्षों तक माणिक कार्तिगई व्रत का पालन करते हुए कहा जाता है कि भक्तों को महान सौभाग्य और भगवान् शिव व् सुब्रह्मण्यम का आशीर्वाद मिलता है। कार्थिगई व्रत में भोजन से पूरी तरह मना होता है पर आज के समय में ऐसा व्रत रखना संभव नहीं है, तो भक्त फल और दूध का सेवन कर सकते हैं।
श्री कृष्ण जी की महिमा को कौन नहीं जानता हैं। और श्री कृष्ण जी के भाई बलराम जी के साथ उनका प्रेम देखते ही बनता था। चंद्र षष्ठी का त्यौहार बलराम जी को ही समर्पित है।
राजस्थान राज्य में हल षष्ठी को 'चंद्र षष्ठी' के नाम से भी जाना जाता है जो यह व्रत त्यौहार भगवान बलराम जी को पूरी तरह से समर्पित है, जो श्री कृष्ण जी के बड़े भाई थे। इस दिन को भगवान बलराम की जयंती के रूप में मनाया जाता है।
शनिवार के दिन पडने वाली अमावस्या को शनैश्चरी अमावस्या के रूप में जाना जाता है और इसका बहुत अधिक महत्व है। इस दिन मंदिरों बहुत भीड़ देखी जा सकती है।
शनैश्चरी अमावस्या और अभिषेक –
सामान्यतः एक वर्ष में दो या तीन शनैश्चरी अमावस्या होती है । शुक्रवार की मध्य रात्रि से लेकर शनिवार की मध्य रात्रि तक प्रार्थना, प्रसाद और 'अभिषेक' आयोजित किया जाता है। मंदिर में, एक 'महापूजा' आयोजित की जाती है । यह अमावस्या सभी धर्मोंकार्यों के लिए अच्छे फल प्रदान करने के लिए जानी जाती है।