गुप्त नवरात्रि में मां दुर्गा और उनकी दस महाविद्याओं की विशेष पूजा की जाती है. गुप्त नवरात्री को विशेष रूप से गुप्त साधानाओं के लिए जाना जाता है. गुप्त नवरात्री के पहले दिन मां काली की पूजा करने का नियम है.
कब मनाते हैं कालाष्टमी:
यह व्रत त्यौहार पूरे विधि-विधान के साथ हिंदू चंद्र माह में कृष्ण पक्ष अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन, हिंदू भक्त पूरी श्रद्धा के साथ भगवान भैरव की पूजा करते हैं और उन्हें प्रसन्न करने के लिए उपवास भी रखते हैं। एक वर्ष में कुल 12 कालाष्टमी के दर्शन होते हैं।
प्रदोष का अर्थ
प्रदोष का अर्थ है "भारी दोष"| चन्द्रमा को क्षय रोग होने के कारण चंद्र देव अंतिम साँसे गिन रहे थे| तभी भगवान् शंकर ने चन्द्रमा को पुनर्जीवन देकर मस्तक पर धारण किया| चंद्र मृत्यु के निकट जाकर भी भगवान् शिव की कृपा से जीवित रहे और पूर्णिमा के दिन तक पूर्णता स्वस्थ हो प्रकट हुए|
प्रदोष व्रत महत्व
जीवन में शारीरिक मानसिक एवं आधयात्मिक रूप से मज़बूत होने के लिए प्रदोष व्रत कारगर मन गया है|प्रदोष व्रत एक ऐसा व्रत है जो मृत्यु के निकट पोहोंचे हुए मनुष्य को जीवन दान देता है| प्रदोष व्रत हर माह के दोनों पक्षों की त्रयोदशी को मनाया जाता है| भगवान् शिव की विशेष और अनंत कृपा पाने के लिए यह व्रत कारगर है| हिन्दू धर्म शास्त्रों में इस व्रत का विशेष महत्व बताया गया है| इस व्रत को हर माह के दोनों पक्षों को करने से व्यक्ति के जीवन के सब कष्टों का निवारण होजाता है| प्रदोष व्रत का अपना महत्व है, परन्तु दिन के अनुसार पड़ने वाले प्रदोष व्रत का अपना अलग महत्व होता है|
मासिक शिवरात्रि महत्व|
हिन्दू धर्म में भोलेनाथ की पूजा को बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है. ऐसा माना जाता है की जो भी भक्त सच्चे मन और आस्था से भोलेनाथ की पूजा अर्चना करता है उसके जीवन के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं. हर वह मनुष्य जो भगवान् शिव का ध्यान पूजा उपासना करता है उसके जीवन की कठिनाई दूर होने लगती है साथ ही कठिनाईयों से बहार निकलने की हिम्मत मिलती है| हर माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मासिक शिवरात्रि मनाई जाती है| महाशिवरात्रि के अलावा भी साल में 12 शिवरात्रि और भी आती हैं, जिन का अलग-अलग महत्व होता है. ऐसा माना जाता है कि मासिक शिवरात्रि के दिन भोलेनाथ स्वयं शिव लिंग रूप में प्रकट होते हैं.
गुप्त नवरात्रि दूसरे दिन मां तारा की पूजा
गुप्त नवरात्रि के तीसरे दिन करें मां षोडशी की पूजा गुप्त नवरात्रि के तीसरे दिन मां षोडशी / त्रिपुर सुंदरी की पूजा करने का नियम है। अगर कोई व्यक्ति सच्चे मन से मां षोडशी /त्रिपुर सुंदरी की पूजा करता है तो उसके जीवन की सभी समस्याएं दूर हो जाती है और उसे सुख और समृद्धि की प्राप्ति होती है। इसके अलावा माघ मॉस में पड़ने वाली गुप्त नवरात्रि के तीसरे दिन मां षोडशी की पूजा करने से मृत्यु के पश्चात् मोक्ष की प्राप्ति होती है। आज हम इस आर्टिकल के माध्यम से आपको बताने जा रहे है की माघ गुप्त नवरात्रि तीसरे दिन मां षोडशी की पूजा कैसे करें।
माँ चंद्रघंटा की पूजा का महत्व - नवरात्रि के तीसरे दिन दुर्गा मां के तीसरे स्वरुप माँ चंद्रघंटा की पूजा करने का नियम है. नवरात्री के नौ दिनों में माँ दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है. मां दुर्गा का तीसरा स्वरुप असुरों का संघार करने के लिए जाना जाता है. मान्यताओं के अनुसार माँ चंद्रघंटा अपने सभी भक्तों के समस्त दुखों को दूर करती हैं. माँ चंद्रघंटा अपने हाथों में तलवार, त्रिशूल, गदा और धनुष धारण करती है. शास्त्रों में बताया गया है की माँ चंद्रघंटा की उत्पत्ति धर्म की रक्षा और संसार से अंधकार को दूर करने के लिए हुई है. ऐसा माना जाता है कि मां चंद्रघंटा की पूजा करने से मनुष्य को आध्यात्मिक और आत्मिक शक्ति प्राप्त होती है. नवरात्री के तीसरे दिन माता चंद्रघंटा की उपासना करने के बाद दुर्गा सप्तशती का पाठ करने से मनुष्य को संसार में यश, कीर्ति और सम्मान की प्राप्ति होती है. आज हम आपको मां दुर्गा के इस तीसरे रूप माँ चंद्रघंटा के बारे में बताने जा रहे हैं.
गुप्त नवरात्री में माँ भुवनेश्वरी की पूजा का महत्व - गुप्त नवरात्रि में साधक माँ के नौ रूपो के साथ साथ दस महाविद्याओं की भी पूजा करते हैं. खासकर जो लोग तंत्र साधना करते हैं वो गोपनीय तरीके से गुप्त नवरात्री में दस महाविद्याओं की पूजा करते हैं. गुप्त नवरात्री के चतुर्थ दिन माँ भुवनेश्वरी की पूजा की जाती है. मां भुवनेश्वरी 10 महाविद्याओं में चतुर्थ स्वरूप विद्या मानी जाती है. मां भुवनेश्वरी को तीनों लोकों की ईश्वरी माना जाता है. मां भुनेश्वरी साक्षात पूरे संसार को धारण करती हैं और इसका पालन पोषण करती हैं. मां भुवनेश्वरी को जगत माता और जगत धात्री के नाम से भी जाना जाता है. मां भुवनेश्वरी आकाश, वायु, पृथ्वी, अग्नि और जल का निर्माण करती हैं. शास्त्रों में मां भुनेश्वरी को मूल प्रकृति कहा जाता है. शास्त्रों में बताया गया है कि माँ भुवनेश्वरी भगवान् शिव के वाम भाग में विराजमान रहती है. इनकी पूजा करने से ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है और जीवन की सभी समस्याएं दूर हो जाती हैं. माँ भुनेश्वरी की पूजा करने से मनुष्य की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं.
गुप्त नवरात्री में माँ त्रिपुर भैरवी की पूजा का महत्व - गुप्त नवरात्री में माँ के नौ रूपों के साथ साथ दस महाविद्याओं की पूजा भी की जाती है. विशेष रूप से जो लोग तंत्र विद्या पर यकीन रखते हैं उनके लिए गुप्त नवरात्री बहुत ही महत्वपूर्ण होती है. गुप्त नवरात्री के छठा दिन माँ त्रिपुर भैरवी की पूजा की जाती है. ये दस महाविद्याओं में छठा स्वरूप विद्या हैं. देवी के समस्त रूपों में से एक जगत प्रसिद्ध देवी त्रिपुर भैरवी भी हैं. माँ त्रिपुर भैरवी तीनों लोकों में सबसे सौंदर्यवान और सभी कर्मो का शीघ्र फलदेने वाली देवी हैं. माँ त्रिपुर भैरवी का सौंदर्य सोलह कलाओं से युक्त सोलह वर्ष की कन्या के समान है. इनके मुख से हजारों सूर्य का तेज निकलता रहता है. माँ त्रिपुर भैरवी की अराधना से समस्त प्रकार के ऐश्वर्य एवं भोग प्राप्त होते है.
गुप्त नवरात्री में माँ कालरात्रि की पूजा का महत्व - गुप्त नवरात्रि के नौ दिनों में दस महाविद्याओं के साथ साथ माँ दुर्गा के नौ अलग अलग रूपो की पूजा भी की जाती है. गुप्त नवरात्री के सातवें दिन माँ कालरात्रि की पूजा की जाती है. माँ कालरात्रि का रंग कृष्ण अर्थात काले रंग होता है, इनका रंग काला होने के कारण इन्हे कालरात्रि कहा जाता है. माँ कालरात्री की पूजा करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है. इसीलिए इन्हे कालरात्रि के साथ साथ शुभंकरी भी कहा जाता है. माँ कालरात्रि को रातरानी के फूल बहुत प्रिय होते है, इसलिए इनकी पूजा में रातरानी के फूल अवश्य अर्पित करें. मां कालरात्रि दुष्टों का अंत करके अपने भक्तों को सभी समस्याओं और संकटों से मुक्ति दिलाती है. मां कालरात्रि अपने गले में नरमुंडों की माला धारण करती है. गुप्त नवरात्रि के सातवें दिन श्रद्धा पूर्वक मां कालरात्रि की पूजा करने से मनुष्य को जीवन की सभी समस्याओं से मुक्ति मिल जाती है और वह शांति के साथ अपना जीवन व्यतीत कर सकता है.
गुप्त नवरात्री में माँ धूमावती की पूजा का महत्व- गुप्त नवरात्रि तंत्र मंत्र साधना पर विश्वास रखने वाले लोगों के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण होती है. इस नवरात्रि में लोग अपनी सिद्धियों को प्राप्त करने के लिए 10 महाविद्याओं की उपासना करते हैं. मां धूमावती दसमहाविद्या में सातवीं विद्या है. शास्त्र रुद्रामल तंत्र में बताया गया है कि सभी 10 महाविद्या शिव की शक्तियां है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार जब माता सती ने अपने पिता के यहां हवन कुंड में अपनी इच्छा अपने आप को जलाकर भस्म कर दिया था. तब उनके शरीर से जो धुआं निकला था उसी धुंए से माँ धूमावती प्रकट हुई थी. अर्थात मां धूमावती धुंए के स्वरूप में माता सती का भौतिक रूप है. मां धूमावती को रोग शोक और दुख को नियंत्रित करने वाली महाविद्या माना जाता है. पद्म पुराण में बताया गया है की दुर्भाग्य की देवी धूमावती मां लक्ष्मी की बड़ी बहन है. परंतु इनका स्वरूप मां लक्ष्मी से बिल्कुल उल्टा है. शास्त्रों के अनुसार मां धूमावती पीपल के पेड़ में निवास करती हैं. मान्यताओं के अनुसार धूमावती को दरिद्रता, अलक्ष्मी और ज्येष्ठा के नाम से भी जाना जाता है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार पाप, आलस्य, गरीबी, दुख और कुरूपता पर माँ धूमावती का आधिपत्य रहता है.
गुप्त नवरात्री में माँ महागौरी की पूजा का महत्व- गुप्त नवरात्री के आठवें दिन यानी कि दुर्गा महाष्टमी के दिन कन्या पूजन करने से पहले महागौरी की पूजा करने का नियम है. देवी महागौरी की पूजा बहुत ही कल्याणकारी और मंगलकारी होती है. मान्यताओं के अनुसार अगर कोई व्यक्ति सच्चे हृदय से महागौरी की पूजा करता है तो उसके सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और मनुष्य को अलौकिक शक्तियों की प्राप्ति होती हैं. गुप्त नवरात्री के आठवें दिन को दुर्गाष्टमी या महाष्टमी भी कहा जाता है. इस दिन मां दुर्गा के आठवें स्वरूप महागौरी की विधिपूर्वक उपासना की जाती है. गुप्त नवरात्री के आठवें दिन मां महागौरी की श्रद्धा पूर्वक पूजा करने से सुख और समृद्धि के साथ सौभाग्य की प्राप्ति होती है. माँ महागौरी अपने भक्तों के सभी कष्टों को दूर करती हैं. और मनुष्य के सभी पाप दूर हो जाते हैं. कई प्रांतो में गुप्त नवरात्र के आठवें दिन कन्या पूजन करने का भी नियम है. देवी महागौरी को रातरानी के फूल बहुत प्रिय होते है. इसलिए अगर आप माँ महागौरी को प्रसन्न करना चाहते हैं तो इन्हे रातरानी का पुष्प अर्पित करें.
गुप्त नवरात्री की महानवमी के दिन माँ सिद्धिदात्री की पूजा का महत्व- गुप्त नवरात्री के नौवें दिन को महानवमी भी कहा जाता है. महानवमी के दिन माँ दुर्गा के नौवें स्वरूप सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है. जो भी भक्त गुप्त नवरात्री के नौवें दिन श्रद्धा पूर्वक माँ सिद्धिदात्री की पूजा करता है मां सिद्धिदात्री उन्हें समस्त प्रकार की सिद्धियां प्रदान करती हैं. माँ सिद्धिदात्री अपने सभी भक्तो को शोक, रोग एवं भय से मुक्ति भी देती हैं. सिर्फ मनुष्य ही नहीं बल्कि देव, गंदर्भ, असुर, ऋषि आदि सभी सिद्धियों को प्राप्ति के लिए माँ सिद्धिदात्री की पूजा करते हैं. भगवान शिव भी माँ सिद्धिदात्री की उपासना करते हैं. गुप्त नवरात्रि के नौवें दिन मां दुर्गा के सिद्धिदात्री स्वरूप की पूजा की जाती है. माँ सिद्धिदात्री की पूजा और उपासना करने से मनुष्य की समस्त मनोकामनाएं पूरी होती हैं और मनुष्य को सभी क्षेत्रों में सफलता प्राप्त होती है. अगर गुप्त नवरात्री की नवमी के दिन माँ सिद्धिदात्री की पूजा की जाये तो मनुष्य को समस्त देवियों की पूजा का फल प्राप्त हो सकता है.
गुप्त नवरात्री में माँ बगलामुखी की पूजा का महत्व- गुप्त नवरात्री में देवी के दस विद्याओं की पूजा की जाती है. दस महाविद्या में आठवीं विद्या है माँ बगलामुखी. गुप्त नवरात्री के आठवे दिन माँ बगलामुखी की पूजा करने का नियम है. माँ बगला मुखी को पीताम्बरा और ब्रह्मास्त्र भी कहा जाता है. माँ बगलामुखी के मुख से पीली आभा निकलती रहती है. इनकी पूजा में पीले रंग का विशेष महत्व होता है. माँ बगलामुखी को स्तम्भन शक्ति की देवी माना जाता है. शास्त्रों में बताया गया है की सौराष्ट्र में आये महातूफ़ान को शान्त करने के लिये भगवान विष्णु ने माँ बगलामुखी की तपस्या की थी. भगवान् विष्णु के द्वारा की गयी तपस्या के फलस्वरुप माँ बगलामुखी का प्राकट्य हुआ था. विशेष रूप से शत्रु और विरोधियों को परास्त करने तथा मुकदमे में जीत हासिल करने के लिए माँ बगलामुखी की उपासना अचूक मानी जाती है.