Indian Festivals

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श्रावण पुत्रदा/ पवित्रा/ पुण्यदा एकादशी | Pavitra Ekadashi on 24 Aug 2026

यह पवित्र एकादशी श्रावण माह के शुक्ल पक्ष में पड़ती है और इस एकादशी को पावित्रोपना या पुण्यदा एकादशी भी कहा जाता है। भक्त इस दिन व्रत रखते है और ईश्वर से संसार में सुखी पूर्वक रहने की कामना करते है । इसी कारण ऐसा भी माना जाता है कि व्रत अवश्य रखना चाहिए।


Eid-al-Adha on 12 Aug 2019

Eid Ul Adha is celebrated every year with a lot of happiness and enthusiasm. It brings happiness to our lives. Moreover, it gives us an opportunity to take a break of hectic life schedule to celebrate it with much enthusiasm. Islamic calendar goes on observation of the Moon and the length of a particular month keep varies from year to year.


रक्षा बंधन| Raksha Bandhan on 28 Aug 2026

रक्षा बंधन को त्यौहार हिदुंओं के प्रमुख त्यौहारों में से एक है। इस दिन बाजारों की रौनक देखते ही बनती है। यह त्यौहार बहुत ही खुशी का पल होता हैं क्योंकि भाई बहन अपने जीवन में कितने ही व्यस्त क्यूँ ना हों, इस शुभ दिन अपने भाई-बहन से मिलने का समय निकाल ही लेते है।


नारली पूर्णिमा | Nareli Purnima on 28 Aug 2026

'नारल' का अर्थ है नारियल और यह फल पूर्णिमा के दिन समुद्र देवता को बहुत ही श्रद्धा के साथ अर्पित किया जाता है।

 

नारली पूर्णिमा हिंदु कैलेंडर के अनुसार श्रावण महीने के दिन मनाई जाती है। इस दिन लोग सुबह जल्दी उठते है और समुद्र देवता की पूजा करते हैं और उन्हें नारियल चढाते हैं। नारली पूर्णिमा को नारियल का त्यौहार भी कहा जाता है और इसे बहुत ही ख़ुशी और उत्साह के साथ मनाया जाता है।

 


हेरम्बा संकष्टी| Heramba Sankashti on 31 Aug 2026

भारतीय संस्कृति में त्यौहारों का बहुत ही बड़ा महत्तव है। और एक ऐसा ही त्यौहार है हेरम्भा संकष्टी बहुत है। हेरम्भा संकष्टी चतुर्थी एक बहुत ही शुभ हिंदू त्यौहार माना जाता है जिसे बहुत ही हर्षोल्लास के साथ हर वर्ष मनाया जाता है।


 

 


बहुला चतुर्थी | Bahula chaturthi on 31 Aug 2026

भारत की इस तपोभूमि में नाना प्रकार के व्रत त्यौहारों का आगमन ऋतु चक्र के अनुसार होता है। यहाँ व्रत त्यौहारों के माध्यम से कभी अपने ईष्ट देव को मनाने तथा कभी प्रकृति के संरक्षण हेतु, तो कभी जीव जंतुओं के संरक्षण हेतु कोई न कोई त्यौहार व व्रत मनाएं जाने की परम्परा युगों से चली आ रही है। जीवन को संवारने हेतु यज्ञ, धर्म, कर्म, व्रत, दान, उपवास, अनुष्ठान, सत्य निष्ठा के साथ सदैव किए जाते रहेे हैं। जो लौकिक और परलौकिक जीवन में छाए घने तिमिर को सूर्य के प्रकाष की भांति हटा गतिषीलता प्रदान कर उसे सुखी व समृद्ध बनाते हैं। बहुला चतुर्थी का व्रत विधि-विधान से करने से मनोरथ सिद्ध होते हैं।


बलराम जयंती | Balram Jayanti on 16 Sep 2026

पूरे भारत में बलराम जयंती बहुत ही प्रसिद्ध है। बलराम जी भगवान कृष्ण के बड़े भाई है और दोनों में काफी स्नेह और प्रेम है और इससे हमें भी अपने भाई-बहनों के साथ प्रेम-स्नेह के साथ की शिक्षा मिलती है।


श्रीकृष्ण जन्माष्टमी | Shri Krishna Janamashtami on 04 Sep 2026

Janmashtami is a festival dedicated to Lord Krishna. It is celebrated every year with a lot of enthusiasm. For Krishna’s devotees, it is quite an important festival. On this auspicious day, Krishna Temples are decorated in a great manner.


दही हांडी | Dahi Handi on 05 Sep 2026

दही हांडी एक बहुत ही अनोखा और मजेदार हिन्दु त्यौहारों में से एक है। यह विशेष त्यौहार श्री भगवान कृष्ण जी को पूर्ण रुप से समर्पित है। यह त्यौहार कृष्ण जी के भक्तों के बीच काफी अधिक प्रसिद्ध और लोकप्रिय है।


प्रदोष व्रत और उसका महत्त्व on 24 May 2021

जीवन मे शारीरिक, मानसिक व आध्यात्मिक रूप से उन्नति प्राप्त करने तथा नाना प्रकार के दुख दर्दों को दूर करने के अति सूक्ष्म किन्तु सरल उपाय धर्मशास्त्रों मे महर्षियों ने बताएं हैं। जिसमें व्रत और उपवास प्रमुख हैं किन्तु व्रत में भोजनादि करने का विधान है लेकिन उपवास मे कुछ भी नहीं खाने अर्थात् निराहार (बिना आहार) रहने का नियम होता है। इन व्रतों का आचरण करने से जहाँ रोग व पाप नष्ट होते हैं वहीं शरीर स्वस्थ होता है और मानसिक शांति भी मिलती है। इसी प्रकार का अति महत्त्वपूर्ण व्रत प्रदोष व्रत है, जिसे करने से भगवान शिवजी की कृपा व प्रसन्नता मिलती है।


आईये जानिए पिठौरी अमावस का महत्त्व on 19 Aug 2020

इस वसुमती की गोद में सदाचार, धर्म, कर्म व व्रत की पताका युग-युगान्तरों से फहराती चली आ रही है। जिसके सहारे यहां जीवन का अस्तित्व अनेकों युगों से वि़द्यमान है। धर्म शाश्त्रो मेें सद्आचण व सुकर्मों की अनेको कथाएं हैं। धर्म व सत्य की रक्षा हेतु साक्षात् प्रभु को भी जन्म के बंधनों में बंधना पड़ा। जीवन को सत्य पथ और धर्म की ओर अग्रसर करने तथा उसे नीरसता व चिंता से बचाने हेतु सद्कर्मों के साथ लौकिक व पारलौकिक जीवन को संवारने हेतु सत्य सनातन धर्म अर्थात् भारत भूमि ने तीज-त्यौहारों के अद्वितीय और विशाल हार को धारण कर रखा है। 


Kalashtami on 23 Aug 2019

Kalashtami or Kala Ashtami is one of the prominent Hindu festivals. It associates to Lord Bhairav and devotees celebrate it with a lot of happiness and enthusiasm this special festival is celebrated on every Hindu lunar month on the ‘Krishna Paksha Ashtami Tithi’.


हरतालिका तीज| Hartalika Teej on 14 Sep 2026

अर्थ - हर का अर्थ है हरण करना और तालिका अर्थात सखी

 

पूजा सामग्री:

 गीली काली मिट्टी या बालू रेत या गौरी शंकर भगवान् की प्रतिमा। बेलपत्र, फल, फूल, दीपक, इत्र, चन्दन, रोली, मोली, जल, घी, कपूर, पंचामृत जरूर बनाएं. क्योंकि भोलेनाथ का इस दिन अभिषेक करना पड़ता है, नारियल पानी वाला, जनेऊ दो,पान पत्ते, मिठाई, धुप.


 


वराह जयंती | Varah Jayanti on 13 Sep 2026

वराह अवतार श्री हरि का यानी विष्णु जी का तीसरा अवतार है|

वराह जयंती के अवसर पर दो कथाओं की मान्यता है|

दिति के गर्भ से हिरण्याक्ष एवं हिरण्यकशिपु ने जन्म सौ वर्षों के गर्भ के पश्चात लिया, इस कारण जन्म लेते ही उनका रूप विशालकाय हो गया। हिरण्याक्ष एवं हिरण्यकशिपु ने ब्रह्मा जी से वरदान प्राप्त किया। और चारो तरफ अपने अत्याचारों से हां हां कार मचा दी| एक बार हरिण्यकश्यप ने वरूण देव को युद्ध के लिये ललकारा तब वरूण ने विनम्रता से कहा कि आपसे टक्कर लेने साहस केवल भगवान विष्णु में ही हैं। हिरण्याक्ष जब विष्णु जी की खोज कर रहा था तब उसे नारदमुनि से पता चला कि भगवान विष्णु वराह अवतार लेकर रसातल से पृथ्वी को समुद्र से ऊपर ला रहे हैं।


ऋषि पंचमी | Rishi Panchmi on 15 Sep 2026

 ऋषि पंचमी महत्व|

1.ऋषि पंचमी का त्यौहार भाद्रपद शुक्ल माह की पंचमी तिथि को मनाया जाता है।

2.ऋषि पंचमी का व्रत महिलाओं व् कुंवारी कन्याओं द्वारा किया जाता है, यह व्रत  माहवारी के दौरान हुए पापकर्मो को नष्ट करने के लिए किया जाता है|

3.परन्तु इस व्रत को कोई भी व्यक्ति अनजाने में लगे दोष (जैसे, किसी भ्रामिन, ऋषि, मुनि का अपमान) को मिटाने के लिए कर सकतें हैं|

4.ऋषि पंचमी के व्रत में सप्तऋषियों का पूजन किया जाता है।