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स्कन्द षष्टी on 28 Feb 2020 (Friday)

स्कन्दषष्टी/चंपा षष्टी महत्व

1.स्कन्दषष्टी दक्षिणी भारत में मनायेजाने वाला एक बहुतही महत्वपूर्ण पर्व है| इसदिन गौरी शंकर भगवानके पुत्र कार्तिकेय  कीपूजा करि जाती है|

2.भगवान्स्कन्द को मुरुगन,कार्तिकेयन,सुब्रमण्या के नाम सेभी जाना जाता है|यह भाद्रपद मॉस के शुक्लपक्ष की षष्टी तिथिको मनाया जाता है| कार्तिकेयके पूजन से रोग,दुःख और दरिद्रता कानिवारण होता है।

3.कथाओंके अनुसार भगवान शिव के तेजसे उत्पन्न छह मुख वालेबालक स्कन्द की छह कृतिकाओंने स्तनपान करा कर रक्षाकी थी, इसीलिए कार्तिकेय'नाम से पुकारा जानेलगा।

4.कार्तिकेयभगवान के अधिकतर भक्ततमिल हिन्दू हैं, इसीलिए इनकीपूजा भारत के तमिलनाडुमें विशेष तौर पर होतीहै। भगवान स्कंद का सबसे प्रसिद्धमंदिर भी तमिलनाडु मेंही है।

5.स्कन्दपुराणमें कुमार कार्तिकेय ही हैं तथायह पुराण सभी पुराणों मेंसबसे बड़ा माना जाताहै।

6.शास्त्रोंमें इस बात काउल्लेख मिलता है कि स्कन्दषष्ठी एवं चम्पा षष्ठीके महायोग का व्रत करनेसे काम, क्रोध, मद,मोह, अहंकार से मुक्ति मिलतीहै और सन्मार्ग कीप्राप्ति होती है।

पूजा विधि

1.स्कन्दषष्टी के दिन स्नानकर खुद को शुद्धकरलें|

2.एकचौकी पर लाल कपडाबिछाएं और कार्तिकेय कीस्थापना करें साथ मेंशंकर-पार्वती व् गणेश जीकी मूर्ति स्थापना करें|

3.भगवानके आगे कलश स्थापनाकरें|

4.सबसेपहले गणेश वंदना करें|

5.अखंडदीपक जलायें अन्यथा सुबह शाम दीपकजरूर जलाएं अथवा धुप अगरबत्तीभी लगाएं|

6.भगवान्पर जल अर्पित करेंतथा नए वस्त्र चढ़ाएं। 

7.फूलया फूलों की माला अर्पितकर फल, मिष्ठान काभोग लगायें।

8.विशेषकार्य की सिद्धि केलिए इस दिन किगई पूजा-अर्चना विशेषफलदायी होती है।

स्कन्दषष्टी कथा

स्कन्दापुराण १८ महापुराणों मेंसे एक है| इसकेअनुसार सुरपदमा,सिंहमुखा,तारकासुर के राक्षसों नेदेव लोक पर कब्ज़ाकर हा हा कारमचा दी, देवताओं औरमनुष्यों पर अत्याचार करा|तथा पूरे देव लोकको तेहेस नेहेस करदिया| तब देव भगवान्शिव के पास सहायताके लिए गए, परन्तुभगवान् शिव ध्यान मेंलीन थे| परन्तु ब्रह्माजी के सलाह अनुसार,देवो ने कामदेव कीसहायता से शिव ध्यानभंग करने के लिएउनके मन में पारवतीके प्रति काम भाव जागरूककिया| जिस से क्रोधितहो भगवान् शिव की तीसरीआँख ने कामदेव कोभस्म करदिया| शिव के शरीरसे निकला वीर्य ६ हिस्सों मेंबंटा और गंगा केतट पर गिरा| औरइसके प्रभाव से ६ बच्चोका जन्म हुआ| यहबच्चे ६ कृतिकाओं केद्वारा जीवित रहे| कुछ समयपश्चात पार्वती ने ६ बच्चोंके शरीर एकत्र करएक करदिया जिससे कार्तिके का नाम दियागया| जब कार्तिके कोदेवताओं पर हो रहेअत्याचार का आभास हुआ,तब उन्होंने तारकासुर का वध करदेव लोक को असुरोंसे मुक्त कराया इस दिन केसन्दर्भ में मनाई जातीहै संकष्टी चतुर्थी|