Banner 1
Banner 2

हरियाली अमावस on 01 Aug 2019 (Thursday)

ऋतु चक्र के क्रम में वर्षा ऋतु के आगाज होते ही वसुंधरा हरी चादर से नवदूल्हन की तरह सज जाती है। चारों ओर पारम्पारिक और मंगल गीतों की गूंज सुनाइ्र्र देती। चहु ओर हरेरा सावन और आमवा और नीम की डाल में किशोर व किशोरियों द्वारा झूले डालकर रिमझिम बरसते सावन के बीच झूलों और गीतों का आनन्द उठाते हुए सम्पूर्ण भारत में हरियाली अमावस को मनाया जाता है। राजस्थान, छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश सहित भारत के अनेक राज्यों में हरियाली अमावस के पर्व पर धार्मिक स्थलों व वन क्षेत्रों में मेले लगते हैं।

 सनातन धर्म व भारतीय धार्मिक ग्रंथों में पेड़, पौधों, जीव, जन्तुओं सहित सम्पूर्ण मानवता को संरक्षण देने हेतु उन्हें धार्मिक भावना से जोड़ उनके प्रति आदर तथा उनका संरक्षण करने की परम्परा सदियों से कामय रही है। पेड़ जो कि जीवन का आधार तथा हमारी प्राण शक्ति स्वांस को शुद्ध कर हमारे जीवन का संरक्षण करते चले आ रहे हैं उन्हें संरक्षित करने तथा धरती मां के आंगन में हरियाली बिखेरने के उद्देष्य से प्रति वर्ष हरियाली आमावस को परम्परागत रूप से मनाया जाता है। वृक्षों में नीम, आम, महुआ, पीपल, बरगद, आदि जो हमें फूल-फल व कई तरह की महत्त्वपूर्ण औषधियां प्रदान करते हैं जो पीढ़ी दर पीढ़ी हमारी सेवा करते चले आ रहे हैं उसमें नीम की बात ही अनोखी है जो अपने रोगनाशक गुणों के कारण जगविख्यात है। जब वर्षा के कारण चारों तरफ कीट पंतगों के कारण बीमारियों की आशंका बढ़ जाती है तो ऐसे समय में प्राकृतिक तरीके से नीम आदि वृक्षों के औषधीय गुणों के कारण हरियाली अमावस के पर्व में उसकी डाल को घरों में रखा जाता है। ऐसी मान्यता है यह गुणकारी वृक्ष केवल कीट पतंगो से ही नहीं बल्कि बुरी आत्माओं से भी रक्षा करता है।

आज के बदलते परिवेश में वृक्षों व जंगलों का अस्तित्व खतरे में है उन्हें संरक्षित करने और उनका क्षेत्र फल बढ़ाने के उदेदष्य से राज्य व भारत सरकार की ओर से हरियाली का स्तर बढ़ाने के लिए कई वन उद्यानों के निर्माण के कार्य इस हरियाली अमावस के मौके पर षुरू किए जाते हैं। इस व्रत में वृक्षों के पूजन व अमावस के दिन तीर्थ स्थानों मे स्नान दान का बड़ा महत्त्व है। शास्त्रों मे वृक्षों के रोपने उनका संरक्षण करने का बड़ा फल व महत्त्च है। एक वृक्ष लगाने से दस पुत्रों के बराबर फल मिलता है। अर्थात् हरियाली अमावस के पर्व में विभिन्न वृक्षों के संरक्षण तथा नीम, पीपल, बरगद आदि के पूजन का विधान भी है। इस दिन वृक्ष लगाने का बड़ा महत्त्व है। इस मौके पर वृक्ष लगाने उसकी सेवा करने से जो फल कुआं, बावली, तालाब, नहर, बोरबेल, खोदने उन्हें जन हित के लिए समर्पित करने व तीर्थ स्थानों में स्नान दान का फल होता है वह इस दिन वृक्ष लगाने से मिलता और अंत मे श्री हरि के धाम में स्थान प्राप्त होता है उसे पुत्र धन यश की प्राप्ति होती है