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ज्येष्ठ गौरी आवाहन on 05 Sep 2019 (Thursday)

 ज्येष्ठ गौरी पूजन 

1.   ज्येष्ठ गौरी पूजन हिन्दू धर्म में मनाये जाने वाला एक बहुत ही सुन्दर पर्व है| जो की मुख्यता महाराष्ट्र की महिलाओं द्वारा बोहोत ही ख़ूबसूरती से मनाया जाता है|

2.   गौरी पूजन तीन दिन तक गौरी आवाहन, गौरी पूजा, अथवा गौरी विसर्जन के रूप में मनाया जाता है|इस वर्ष गौरी पूजा सितम्बर से शुरू हो सितम्बर तक मनाई जाएगी|

सितम्बर - गौरी आवाहन

सितम्बर - गौरी पूजन

सितम्बर - गौरी विसर्जन

3.   गौरी पूजन गणेश चतुर्थी व् गणेश विसर्जन के बीच मनाये जाने वाला पर्व है|

गौरी आवाहन
 

गौरी आवाहन महत्व

गौरी आवाहन भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को मनाया जाता है| अखंड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए मराठी महिलाएं यह व्रत करती हैं| इस दिन महिलाएं गौरी मूर्ति की स्थापना कर उनका श्रृंगार करतीं हैं अथवा महिलाये खुद भी सूंदर वस्त्र और गहनों से श्रृंगार करती है| गौरी आवाहन के दिन महिलाएं बड़ी धूम धाम से गौरी मूर्ति लेकर घर में स्थापना कर उनका पूजन करतीं है| गौरी मूर्ति को गणेश जी की मूर्ति के साथ ही रखा जाता है|

गौरी आवाहन मान्यता

ऐसी मान्यता है कि जब असुरों का अत्याचार महिलाओं पर बहुत बढ़ गया था तब महिलाओं ने सहायता के लिए गौरी माता की शरण ली और माँ गौरी ने उनकी रक्षा कर उनको असुरों के अत्याचार से मुक्त कराया| तभी से महिलाएं सुख समृद्धि, धन धान्य, अथवा अखंड सौभाग्य, सुखद वैवाहिक जीवन, मनचाहे विवाह के लिए यह व्रत करती आयी है|

गौरी आवाहन विधि

इस दिन सोलह अंक को शुभ माना जाता है इसलिए, १६ औरतों को बुलाया जाता है १६ श्रृंगार की वस्तुएं बाटी जाती है, १६ मेवा,फल, मिठाई का भोग लगाया जाता है परन्तु अगर आप १६ नहीं कर पाएं तो आप अपनी क्षमता अनुसार भी कर सकतीं हैं|

1.        गौरी मूर्ति को खुद से घर में मिटटी से बनाना सबसे शुभ होगा अन्यथा आप बाजार से भी ला सकते है|

2.        गौरी मूर्ति की स्थापना बहुत ही धूम धाम से करें|

3.        घर को सुन्दर फूल, दीयों और रंगोली से सजाएं|

4.        माँ की मूर्ति घर में लाते समय द्वार पर उनको हल्दी कुमकुम का तिलक कर उनकी आरती कर उनका स्वागत करें|

5.        उनके चरणों को कुमकुम में डुबो कर एक कपडे पर छाप लें|(यह कपडा आप अपने पूजा स्थान पर भी रख सकते है और रोज़ इसे प्रणाम कर आशीर्वाद ले| या आप इसे अपने धन के स्थान पर भी रख सकते हैं|)

6.        एक चौकी पर लाल कपडा बिछाएं उसपे कलश स्थापना करें|

7.        गौरी मूर्ति स्थापना गणेश मूर्ति के निकट ही करि जाएगी|

8.        दो (एक माँ पारवती दूसरी बेहेन अशोक सुंदरी) गौरी मूर्ति इस चौकी पर स्थापित करें|

9.        सबसे पहले गौरी मूर्तियों को उबटन व् जल से स्नान कराएं|

10.      उनको लाल या गुलाबी रंग के वस्त्र पहनाएं

11.      उनका सोलह श्रृंगार करें

12.     फूल एवं लाल फूलों की माला उन्हें अर्पित करें|

13.     साथ ही फल मिष्ठान का भोग लगाएं|

14.     कपूर से आरती कर पार्वत्यै नमः का क्षमतानुसार जाप करें|

15.     इस दिन महिलाएं लोक गीत संगीत से इस उत्सव को मनाती हैं|