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घट स्थापना/शारदीय नवरात्री on 29 Sep 2019 (Sunday)

चातुर्मास हिन्दू धर्म के बहुत ही महत्वपूर्ण चार महीने हैं| इन् महीनो की शरुआत सावन से होकर कार्तिक मॉस पर पूर्ण होती है| इन् चार महीनो के दौरान हिन्दू धर्म के सबसे महत्वपूर्ण त्यौहार आते हैं जैसे सावन, श्राद्ध, शरद नवरात्री, दिवाली और भी बहुत| इन्ही चातुर्मास के दौरान आने वाला एक त्यौहार है "शरद नवरात्री" जो की बहुत ही ख़ूबसूरती और धूम धाम से मनाया जाता है| यह एक ऐसा समय होता है जिसमें हर इंसान माँ की कृपा से अपनी झोलियाँ लबा लब भर सकता है|

शारदीय नवरात्री इस बार 29 सितम्बर से शुरू होकर 7 अक्टूबर तक मनाई जाएगी| शरद नवरात्री सबसे महत्वपूर्ण नवरात्री है जिसमे शक्ति, प्रेम, सौम्यता, की देवी माँ दुर्गा की नौ दिन तक पूजा की जाती है|नवरात्रि के नौ दिनों के दौरान मां शक्ति के नौ रूपों की पूजा की जाती है| इस पर्व की तैयारी में घर का हर एक सदस्य जुड़ जाता है| बड़े बुज़ुर्ग से लकर छोटे बच्चों तक हर किसीको इस पर्व से बहुत प्रेम है| नवरात्री के दौरान पूजा उपासना के अलावा लोग अन्य कार्यक्रमो का आयोजन भी करते है जैसे जागरण, डांडिया, मेला| इसी नवरात्री के दौरान कई जगहों पर रामलीला का आयोजन भी किया जाता है|नवरात्री के दौरान माहिलाएं घर को सजाती हैं, खुद भी श्रृंगार करती है और मेहँदी लगती हैं| नवरात्री के दौरान पूरे नौ दिन तक व्रत करने का बहुत महत्व है| नवरात्री की शुरुआत कलश स्थापना से होती है, जिसे घटस्थापना भी कहा जाता है| कलशस्थापना के साथ इस नवरात्री में जौ बोना भी बहुत महत्वपूर्ण होता है| जिसे घर की सुख समृद्धि और सम्पन्नता के लिए बोया जाता है|कलश स्थापना नवरात्री के पहले दिन आश्विन मास की प्रतिपदा तिथि को की जाती है|

कलश स्थापना व् पूजा विधि|

नवरात्री के दिनों में दोनों वक़्त की पूजा उपासना बहुत ही महत्वपूर्ण है|

1.            सूर्य उदय के पूर्व उठें और स्नान आदि कर खुद को शुद्ध करलें|

2.            सबसे पहले भगवान् सूर्य को जल अर्पित करें|

3.            एक चौकी लें या मंदिर में ही कुमकुम से स्वस्तिक बनाएं|

4.            उसपे लाल कपडा बिछाएं और माँ दुर्गा का चित्र व् मूर्ति स्थापित करें|

5.            एक लोटे में जल भरलें और उसपे आम के पत्ते रखें|

6.            लोटे के मुख पर कलावा बांधे और कुमकुम से उसपे स्वस्तिक बनाएं|

7.            अब माँ दुर्गा का नाम लेते हुए भगवान् गणेश जी को याद करते हुए नारियल को जल के लोटे पर स्थापित करें|

8.            कलश के आगे हाथ जोड़ कर सर झुका कर प्रणाम करें|

9.            अब एक मिटटी का पात्र लें उसपे भी कलावा बांधे पर रोली से स्वस्तिक बनाएं|

10.          उस मिटटी के पात्र में मिटटी के बीच जौ ज्वारे बो दें|

11.          अब माँ के चरण धोये और उन्हें जल का छींटा भी दें|

12.          उन्हें नए वस्त्र अर्पण करें| लाल या गुलाबी रंग के हो|

13.          अब उन्हें सोलह श्रृंगार की वस्तुएं अर्पण करें|

14.          उन्हें हल्दी कुमकुम का तिलक करें|

15.          माँ को सुपारी, पंचमेवा, इलाइची, लौंग, पताशे आदि फल मिठाईयों का भोग लगाएं|

16.          अब जो सबसे महत्वपूर्ण प्रक्रिया है पूरे नवरात्री की- नवरात्री में अखंड जोत जगाई जाती है जिसका फल बहुत ही शुभ होता है| परन्तु आप अपनी क्षमता व् सामर्थ्य के अनुसार जोत जगा सकतें हैं|

17.          अखंड जोत जगाने की विधि-एक मीठी या पीतल या चांदी का दिया लें| उसमें कलावे की बनी बत्ती लगाएं| और उसमें घी पिघला कर डालें| कुछ देर बत्ती को पूरा घी में डूबे रहने दे और फिर बत्ती बहार निकाल उसे प्रज्वलित करें|

जोत जगाते समय माँ दुर्गा का यह मन्त्र पढ़े:- "सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके। शरण्ये त्र्यंबके गौरी नारायणि नमोस्तुते॥"

अर्थात: हे नारायणी! तुम सब प्रकार का मंगल प्रदान करने वाली मंगल मयी हो। कल्याण दायिनी शिवा हो। सब पुरुषार्थो को (धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष को) सिद्ध करने वाली हो। शरणागत वत्सला, तीन नेत्रों वाली एवं गौरी हो। हे नारायणी, तुम्हें नमस्कार है।(यह मन्त्र अगर आप पढ़ पाएं तो बहुत उत्तम होगा अन्यथा आप इसे फ़ोन में टीवी में या किसी भी तरह से चला सकतें है)

18.          अब माँ देवी का सप्तशती का पाठ करें और आरती कर अपनी सुबह की पूजा समाप्त करें|

19.          शाम के समय प्रदोष काल के वक़्त माँ दुर्गा चालीसा पढ़ें व् उनकी आरती करें और उन्हें फलाहार भोजन जैसे कुट्टू की पकोड़ी, सामक की पूरी आलू सब्ज़ी आदि का भोग लगाएं और खुद  ग्रहण करें|