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हरतालिका तीज : व्रत कथा, पूजन सामग्री एवं विधि on 01 Sep 2019 (Sunday)

अर्थ: हर का अर्थ है हरण करना और तालिका अर्थात सखी|

पूजा सामग्री: गीली काली मिट्टी या बालू रेत या गौरी शंकर भगवान् की प्रतिमा। बेलपत्र, फल, फूल, दीपक, इत्र, चन्दन, रोली, मोली, जल, घी, कपूर, पंचामृत जरूर बनाएं. क्योंकि भोलेनाथ का इस दिन अभिषेक करना पड़ता है, नारियल पानी वाला, जनेऊ दो,पान पत्ते, मिठाई, धुप.

विधि:

1.        स्नान कर व् सर धो कर के खुद को शुद्ध करें|

2.        प्रदोष काल (दिन रात के मिलने का समय) में पूजा करे|

3.        चौकी पर लाल कपडा बिछा के उस पर केले के पत्ते बिछाएं (केले के पत्ते बहुत ही पवित्र और शुभ माने जाते है क्यों की इसमें देव गुरु एवं विष्णु जी का निवास होता है)|

4.        शिव परिवार या गौरी शंकर की गणेश जी सहित प्रतिमा स्थापित करें|

5.        कलश स्थापना करें| एक लोटे में जल भरलें, उसके मुख पर श्रीफल रखें|लोटे और श्रीफल पर मोली बांधे अथवा स्वस्तिक बनाएं|

6.        सबसे पहले गणेश जी को याद कर अपनी पूजा को स्वीकार करने की भगवान् से प्रार्थना करें| अपनी पूजा प्राम्भ करें गणेश वंदना के साथ|

7.        गणेश पूजा के बाद, गौरी शंकर भगवान की संयुक्त पूजन करें|

8.        सबसे पहले जल अर्पित करें|

9.        शंकर भगवान् को पीला व् माँ गौरी को लाल वस्त्र अर्पित करें/अगर वस्त्र उपलब्ध हो तो मोली(कलावे) को वस्त्र के रूप में अर्पित करें

10.     भगवन शंकर को चन्दन व् रोली अर्पित करें|

11.     माँ पार्वती को रोली का तिलक करें व् १६ श्रृंगार की वस्तएं अर्पित करें|(सिन्दूर, बिंदी, मंगलसूत्र, झुमकें, चूड़ियां, बिछिया, मेहँदी, पायल, नाथ (नोज पिन), महावर(आलता), लिपस्टिक, काजल, अंगूठी, तेल(हेयर आयल), क्रीम(फेस क्रीम). नेल पोलिश)

12.     शंकर भगवान् को चन्दन का इत्र अर्पित करें एवं माँ गौरी को गुलाब का इत्र अर्पित करें|

13.     फूल या फूलों की माला अर्पित करें| भगवान् गणेश को दूर्वा अर्पित करें|

14.     फल मिठाईयों का भोग लगाएं| क्षमता अनुसार दक्षिणा अर्पित करें|

15.     हरतालिका तीज की कथा पढ़ें और सर्व प्रथम गणेश जी की आरती करें गौरी शंकर भगवान् की पूजा करें और अंत में दोनों की कपूर से आरती करें|

16.     पूजा संपन्न होने के बाद भगवान् की परिक्रम्मा करें|

17.     ऐसी मान्यता है की रात्रि जग कर इस व्रत में जागरण पूजा उपासना की जाती है परन्तु आप अपनी क्षमता अनुसार रात्रि ध्यान पूजन कर आराम कर सकतें है|

18.     अगले दिन शुद्ध हो सुबह की पूजा कर माँ पार्वती को सिन्दूर अर्पित करें| यह सिन्दूर व् गुलाब का इत्र सुहागिन खुद इस्तेमाल करे अथवा चन्दन का इत्र उनके पति इस्तेमाल करें| सुंगंध दोनों पति पत्नी के बीच प्रेम बनाएं रखने में कारगर होती है|

19.     समस्त वस्तुएं भ्रामिन और भ्रामिणी को दान में दें|

20.     परशाद खा कर व्रत का समापन करें|

हरतालिका तीज व्रत कथा:

भगवान शिव शंकर ने माता पार्वती को उनके पूर्वजन्म की घटनाओं से अवगत कराने के लिए यह कथा सुनाई थी। हरियाली तीज व्रत की कथा कुछ इस प्रकार से है

भगवान शिव शम्भू पार्वती जी से कहते हैं- हे देवी! बहुत समय पूर्व तुमने मुझे अपने पति के रूप में पाने के लिए हिमालय पर कठोर तप किया था। उस दौरान तुमने सिर्फ सूखे पत्ते चबाकर अपने दिन व्यतीत किए थे। धूप, गर्मी, बरसात, सर्दी हर मौसम में तुमने अपना तप जारी रखा। इससे तुम्हारे पिता पर्वतराज काफी दुखी थे। इसी बीच नादर मुनि तुम्हारे घर पहुंचे। तुम्हारे पिता ने उनसे आने का कारण जाना, तो नारद जी ने कहा कि वह भगवान विष्णु के आदेश पर यहां आए हैं। भगवान विष्णु आपकी पुत्री की कठोर तपस्या से प्रसन्न हैं, अत: वे उससे विवाह करना चाहते हैं। इस प्रस्ताव के संदर्भ में आपकी राय जानने के लिए मैं यहां आया हूं।

नारद मुनि की बात सुनकर पर्वतराज अत्यंत प्रसन्न हुए। उन्होंने नारद जी से कहा कि वह इसे प्रस्ताव को स्वीकार करते हैं और अपनी पुत्री का विवाह भगवान विष्णु से करने के लिए तैयार हैं। पर्वतराज की स्वीकृति पाकर नारद मुनि भगवान विष्णु के पास जाते हैं और उनको विवाह के बारे में सूचित करते हैं। लेकिन जब इस विवाह की जानकारी तुम्हें होती है, तो तुम दुखी हो जाती हो क्योंकि तुम अपने मन से मुझे अपना पति स्वीकार कर चुकी हो।

भगवान शिव माता पार्वती से आगे कहते हैं कि तुम अपने मन की पीड़ा सहेली से कहती हो। इस पर सहेली ने तुम्हें एक घनघोर वन में जाकर शिवजी की आराधना करने का सुझाव दिया। तुम मुझे प्राप्त करने के लिए वन में साधना करने लगती हो। जब इसके बारे में तुम्हारे पिता को ज्ञात हुआ तो वे दुखी हुए। वह सोचने लगे कि विष्णुजी बारात लेकर द्वार पर आएंगे और पुत्री घर पर नहीं होगी तो क्या होगा। उन्होंने तुम्हें खोजने के लिए पृथ्वी और पाताल के हर कोने में अपने दूत भेजे, लेकिन तुम्हारा कुछ पता नहीं चला।

तुम एक वन में गुफा के अंदर मेरी साधना में लीन थी। श्रावण शुक्ल तृतीया को तुमने रेत से एक शिवलिंग का निर्माण कर मेरी आराधना की, जिससे प्रसन्न होकर मैंने तुम्हारी मनोकामना पूर्ण की। इसी बीच तुम्हारे पिता उस गुफा तक पहुंच जाते हैं। तब तुमने अपने पिता पर्वतराज से कहा कि तुम्हारी कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने तुम्हें स्वीकार कर लिया है। तुम एक शर्त पर ही घर जाओगी, जब तुम्हारी शादी भगवान शिव से करायी जाएगी। तुम्हारे पिता ने शर्त स्वीकार कर ली और बाद में हम दोनों का विवाह करा दिया।

भोलेनाथ ने कहा, हे पार्वती! श्रावण शुक्ल तृतीया को तुमने जो व्रत किया था, उसके कारण ही हम दोनों का विवाह हुआ। जो भी महिला पूरे मनोयोग से इस व्रत को करती है, उसे मैं मनोवांछित फल प्रदान करता हूं। इस व्रत के फलस्वरूप उसे महिला को अखंड सुहाग का आर्शीवाद प्राप्त होगा।

राशि अनुसार हरतालिका तीज पर करें ये उपाय होगी हर मनोकामना पूर्ण:

1.    मेष - भगवान् शिव का दही से अभिषेक करें और माँ गौरी को लाल चुनरी अर्पित करें| लाल फूलों की एक ही माला शिव पारवती को साथ चढ़ाएं और नागेश्वराय नम: का क्षमता अनुसार जप करें|

2.    वृषभ- भगवान् शिव का कच्चे दूध व् जल से अभिषेक करें और माता पारवती को गुलाबी चूंनरी चढ़ाएं| किसी बैल या गायें को हरी घांस या रोटी खिलाएं और रुद्रनाथ नमः|

3.    मिथुन- भवान शिव को बेलपत्र अर्पित करें माता पारवती को हरी चूंनरी चढ़ाएं| नम: शिवाय का क्षमता अनुसार जाप करें |

4.    कर्क - भगवान् शिव को कच्चे दूध में जल मिला कर अर्पित करें भगवान शिव को चन्दन अर्पित करें| माँ पारवती को चांदी की बिछिया चढ़ाएं सोमनाथ नमः क्षमता अनुसार जाप करें।

5.    सिंह - भगवान् शिव को शीतल जल में गुड़ मिला कर अर्पित करें| नारंगी चुनरी माँ पारवती पर चढ़ाएं रामेश्वर नमः का जाप करें अथवा गुड़ का दान करें।

6.    कन्या- भगवान् शंकर का गन्ने के रस से अभिषेक करें माँ पारवती को मेहँदी अर्पित करें| गणपिता नमः का क्षमता अनुसार जाप करें।

7.    तुला -भगवान् शिव पर पंचामृत अर्पित करें अथवा माँ पारवती पर हलके गुलाबी रंग की चुनरी चढ़ाएं| सफ़ेद और गुलाबी फूलों की एक ही माला भगवान् शिव पार्वती पर चढ़ाएं उमापति नमः का जाप करें।

8.    वृश्चिक- भगवान शिव पर शहद और जल अर्पित करें और माँ पार्वती पर लाल चूंनरी चढ़ाएं| गरीबो में अन्न बांटे और भोले बाबा नमः का क्षमता अनुसार जप करें|

9.    धनु भगवान् शिव पर केसर, चीनी, और दूध मिला जल अर्पित करें अथवा माँ गौरी को पीली चूंनरी चढ़ाएं| ओंकारेश्वर नमः का क्षमता अनुसार जाप करें और पीली मिठाई का दान करें|

10. मकर - भगवान् शिव को नारियल पानी में जल मिला कर अर्पित करें और माँ पारवती को आसमानी नीले रंग की चमकदार चूंनरी चढ़ाएं| काली उड़द का दान करें और शम्भू नमः का क्षमता अनुसार जप करें|

11. कुम्भ - भगवान् शिव पर सदा जल अर्पित करें और माँ गौरी पर सुनहरी चूंनरी अर्पित करें| गरीब विद्यार्थियों में पुस्तकें बाटें और काली दाल चावल का दान करें|

12. मीन - भगवान् शिव पर पर गंगाजल मिला जल अर्पित करें और माँ गौरी पर पीले रंग की चूंनरी चढ़ाएं| केले का दान करें और आदिनाथ नमः का शमता अनुसार जाप करें