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ऋषि पंचमी का महत्व और मान्यताएं on 03 Sep 2019 (Tuesday)

1.    ऋषि पंचमी का त्यौहार भाद्रपद शुक्ल माह की पंचमी तिथि को मनाया जाता है।

2.    ऋषि पंचमी का व्रत महिलाओं व् कुंवारी कन्याओं द्वारा किया जाता है, यह व्रत माहवारी के दौरान हुए पापकर्मो को नष्ट करने के लिए किया जाता है|

3.    परन्तु इस व्रत को कोई भी व्यक्ति अनजाने में लगे दोष (जैसे, किसी भ्रामिन, ऋषि, मुनि का अपमान) को मिटाने के लिए कर सकतें हैं|

4.    ऋषि पंचमी के व्रत में सप्तऋषियों का पूजन किया जाता है।

5.    समस्त पापों का नाश करने वाला यह व्रत अत्यंत पुण्य फलदायी है।

6.    वैसे तो सभी दिन ऋषि, मुनि,साधु,संत का सम्मान करने के लिए महत्वपूर्ण व् शुभ होते है परन्तु ऋषि पंचमी के दिन यदि आपको कोई ऋषि, मुनि, भ्रामिन, मिले तो उसका आदर कर उसे क्षमता अनुसार दान, भोजन,फल दें या सेवा करें|

ऋषि पंचमी की मान्यताएं आज के आधुनिक दौर के चलते उचित नहीं है| पहले ज़माने में औरतों के पास सुविधाएँ उपलभ्द होने के कारण, उनके लिए स्वछता बनाये रखना कठिन होता था| जिसके चलते माहवारी के समय औरतों को घर, मंदिर, रसोईघर, से अलग रखा जाता था| परन्तु आज के समय में औरतों के पास स्वछता बनाये रखने के लिए कईं साधन उपलभ्द है| यह महिलाओं को इंद्र के पाप का एक हिस्सा मिला जिसके फलस्वरूप उन्हें हर महीने मासिक धर्म होता है। इसके साथ ही उन्हें माँ बनने का वरदान भी दिया गया| यह पाप इंद्र के हिस्से का जिसे महिलाएं बिना गलती के भोग कर पूरे संसार को आगे बढ़ा रही है, उन्हें हम मंदिर , रसोईघर, जाने से कैसे रोक सकते हैं जो स्वयं ही देवता का पाप अपने हिस्से में संभाल के एक वरदान की तरह इस संसार में अपना बहुत बड़ा योगदान कर रही है| फिर भी लोगो की आध्यात्मिकता और विश्वास तथा हमारे धर्म की मान्यताओं का सम्मान करते हुए हम इस त्यौहार को और इसके महत्व को प्रणाम करतें हैं|