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दर्शवला अमावस्या on 22 May 2020 (Friday)

दर्शा अमावस्या महत्व  

 

हमारा हिंदुस्तान हमेशा से ही बहुत से पर्व और त्यौहारों के लिये प्रसिद्ध रहा है। और एक ऐसा ही पर्व है दर्शन अमावस्या। अमावस्या या अमावसी को उस दिन के रूप में माना जाता है जब चंद आकाश में दिखाई नहीं देता है। हम यह भी कह सकते हैं कि हिंदू परंपरा में चंद्र कैलेंडर के अनुसार अमावस्या की रात चाँद नहीं दिखता है।चांद्र मास की पहली तिमाही में, यह पहली रात कहलाती है। हालाँकि आज भी धार्मिक लोग इस बात पर बहस करते हैं कि अमावस्या को शुभ कहा जायें या अशुभ। यहाँ हम अपने सिनेमा का शुक्रिया अदा कर सकते हैं जहाँ यह दिखाया जाता है कि अमावस्या पर सभी काले जादू और बुरे काम किए जाते हैं। पहले यह सलाह दी जाती थी कि अमावस्या की रात्री को यात्रा न करें क्योंकि उस दिन चांदनी नहीं होती है और इस कारण यह खतरे को आमंत्रित करती है।

 

इस दिन ज्योतिषी लोगों को कोई भी शुभ कार्य करने की सलाह नहीं देते हैं, क्योंकि हिंदू ज्योतिष में चंद्रमा और महत्वपूर्ण ग्रह दिखाई नहीं देते हैं। इसलिए इस दिन कोई नया  उद्यम या महत्वपूर्ण समारोह आयोजित नहीं करना चाहिए।

 

यदि हम प्रतीकात्मक शब्दों में बात करें, तो अमावस्या से पूर्णिमा तक की अवधि को यशक्रम जागृति और परिपूर्णता में श्रेष्ट माना जा सकता है। अंधेरे से लेकर सर्वोच्च आत्मा के क्रमिक अनुभूति तक, जिसे हम "तमसो मा ज्योतिर्गमय" कहते हैं।

 

भारत के ज्यादातर हिस्से में 'अमावस्या' शब्द का आमतौर पर इस्तेमाल किया जाता है। परन्तु विभिन्न राज्यों में इसे अलग-अलग नामों से भी पुकारा जाता है साथ ही साथ अलग अलग महीनों में अलग अलग नाम से भी पुकारा जाता है। जैसे माघ महीने को 'मौनी अमावस्या' कहा जाता है और आश्विन महीने में इसे 'महाकाल अमावस्या' कहा जाता है। तमिलनाडु में आदि महीने में अमावसी का अत्यधिक महत्व है। जबकि केरल में कार्किदकम महीने की अमावस्या का अधिक महत्व है।