Indian Festivals

करवा चौथ व्रत महत्व|

करवा चौथ व्रत महत्व|

चातुर्मास के शुरू होते ही अनेको व्रत त्योहारों की शुरुआत होजाती है| जिसमें कार्तिक के महीने में पड़ने वाले त्यौहार व् व्रत सबसे महत्वपूर्ण माने गए हैं| इन्ही महत्वपूर्ण व्रतों में एक सबसे ख़ास व्रत आता है जिसे करवा चौथ कहा जाता है|

हिन्दू धर्म में सुहागिन महिलाओं का सबसे महत्वपूर्ण व् प्रिय त्यौहार है करवा चौथ| सभी सुहागन महिलाएं इस त्यौहार पूर्ण श्रद्धा व् विशवास से मनाती हैं| इस दिन सुहागन महिलाएं अपने पति की लम्बी आयु व् अच्छे स्वास्थ्य के लिए यह व्रत को नियम अनुसार करतीं हैं| इस दिन चौथ माता व् गणेश जी पूजा करने का विधान है| सभी महिलाएं इस त्यौहार को लेकर बहुत ही उत्सुक होतीं है और इसके आने से कुछ दिन पहले से ही इस पर्व की तैयारियां शुरू कर देतीं हैं| इस व्रत से केवल पति की आयु लम्बी ही नहीं बल्कि पति पत्नी का ग्रहस्त जीवन भी बहुत शुभ व् सुखद होजाता है| हालांकि पूरे भारत में ही इस व्रत को किया जाता है परन्तु उत्तर भारत में इस व्रत की कुछ ख़ास मान्यताएं हैं|

पूरा दिन निर्जल व्रत करने के बाद महिलाएं चन्द्रमा का बेसब्री से इंतज़ार करतीं हैं| और चन्द्रमा भी रोज़ की अपेक्षा सभी को बहुत इंतज़ार करने के बाद उदय होतें हैं| चन्द्रमा के दर्शन से मन जाता है की सुखद दाम्पत्य जीवन का सुख प्राप्त होता है|

चंद्रमा के उदय के बाद चंद्रमा का प्रतिबिंब एक जाल की थाली में देखा जाता हैं। कई स्थानों पर छलनी के माध्यम से भी चंद्रदर्शन किए जाते हैं। चंद्रमा की व्यक्तिगत और सामूहिक रूप से पूजा-अर्चना की जाती है। व्रत की कथाएं सुनाई जाती हैं, पति के चरण स्पर्श किए जाते हैं।करवे में रखे मिठाई या पताशे बांटे जाते हैं। इसके बाद व्रत समाप्त माना जाता है और सभी व्रत करने वाली स्त्रियां अन्न-जल ग्रहण करती हैं।

करवा चौथ के दिन तोहफों में दो चीजें काफी महत्वपूर्ण होती है- 'सरगी' और 'बाया'। यह दो चीजें तोहफे में जरूर दी जाती हैं। इसके बिना करवा चौथ का पर्व अधूरा माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि इसे देने से पति-पत्नी का रिश्ता और भी गहरा होता है।

कैसे शुरू हुआ करवा चौथ?

सावित्री ने अपने पति की मृत्यु होजाने पर भी यमराज को उन्हें नहीं लेजाने नहीं दिया और अपनी प्रतिज्ञा, तपस्या से अपने पति को फिर से प्राप्त किया| दूसरी मान्यता महाभारत से है| जब पांडवो में से अर्जुन, वनवास काल में तपस्या करने नीलगिरि चले गए थे| द्रौपदी ने अर्जुन के जाने के बाद अपने भाई कृष्ण से, अर्जुन की रक्षा के लिए मदद मांगी| तब भगवान् कृष्ण ने द्रौपदी से वैसा ही व्रत करने को कहा जैसा माता पारवती ने भगवान् शिव के लिए रखा था|

मुहूर्त 

करवा चौथ पूजा मुहूर्त - 17:43 से 18:51 तक

अवधि – 1 घंटे 7 मिनट
चंद्रोदय समय – 20:07:00

 संध्याकालीन पूजा समय शाम 6: 55 से 8: 51 तक

करवा चौथ व्रत की सरलतम विधि :-

 इस व्रत की शुरुआत सरगी के साथ की जाती है साँस अपनी बहु के लिए पूर्ण सरगी, फल, मिठाईयां, फेनी, वस्त्र,आदि सभी वस्तुएं देतीं हैं| और बहु भी अपनी साँस का आशीर्वाद लेकर अपने व्रत की शुरुआत करतीं हैं|

सुबह की पूजन विधि|

  • इस दिन भोर में उठे सूर्य उदय के पूर्व|

  • सरगी खा कर अपने व्रत की शुरुआत करें|

  • सरगी में तला हुआ भोजन काम से काम खाएं|

  • सरगी खाने के बाद कोशिश करें की अनार ज़रूर खाएं| यह आपको सेहत में बहुत फायदा करेगा|

  • अपनी सांसु माँ का आशीर्वाद भी लें जिनकी वजह से आप करवा चौथ का व्रत कर पा रही हैं|

  • स्नान आदि कर खुद को शुद्ध करलें|

  • सूर्य को जल अर्पित करें व् भगवान् के आगे हाथ जोड़ कर व्रत का संकल्प करें|

  • अपनी सांसु माँ का आशीर्वाद भी लें जिनकी वजह से आप करवा चौथ का व्रत कर पा रही हैं|

  • अब पूजन सामग्री लेकर या तो मंदिर जाएं अन्यथा घर के ही मंदिर में पूजन करें|

  • भगवान् शंकर माँ गौरी को जल अर्पित करें उन्हें तिलक करें व् श्रृंगार वस्तुएं भी चढ़ाएं|

  • महादेव व् माँ गौरी को पीले व् लाल फूलों की माला भी अर्पित करें|

  • अब गौरी शंकर भगवान् की विधि वत आरती करें|

  • उनके समक्ष हाथ जोड़ कर निर्जल उपवास की प्रार्थना भी करें|

दुपहर की पूजन विधि|

  • अब दुपहर के समय एक मिटटी के कलश में जल भर लें|

  • उससे ढक दें और उसपे फल, रुपये, मिठाई, चावल व् कुमकुम रखें|

  • किसी किसी जगहों में मीठा करवा भी रखा जाता है|

  • भगवान् गौरी शंकर की स्थापना करें व् गणेश जी की मूर्ति स्थापित करें|

  • अब चौकी व् कलश पर स्वस्तिक बनाएं|

  • भगवान् को तिलक करें|

  • कलश पर कलावा भी बांधें|

  • अब गणेश जी का नाम लेकर अपनी पूजा आरम्भ करें|

  • अब करवा चौथ की कथा भी पढ़े| ऐसी मन्यता था की अकेले कथा नहीं पढ़ी जाती इसलिए साथ ही गणेश जी की कथा भी पढ़े|

  • और भगवान् के आगे हाथ जोड़ कर अपने पति की लम्बी आयु की कामना करें और व्रत को जारी रखें|

चंद्र पूजन व् अर्घ्य|

  • रात में पक्का खाना बनाएं|

  • अब चन्द्रमा निकलने के बाद एक लोटे में जल लेलें|

  • अब चन्द्रमा को अर्घ्य दें उनकी आरती करें|

  • अपने पति की लम्बी आयु व् अच्छे स्वास्थ्य की कामना भी करें|

  • छलनी में से चन्द्रमा देखते हुए अपने पति को देखें|

  • उनके चरण भी छुएं और उनके हाथ से जल ग्रहण कर अपने व्रत को पूर्ण करें|

  • अब घर की बड़ी बुज़ुर्ग